Aug 07, 2026

उत्तराखंड में खेल क्रांति की शुरुआत! 29 अगस्त से शुरू होगा राज्य के पहले खेल विश्वविद्यालय का पहला सत्र 

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देहरादून। उत्तराखंड में खेलों के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। प्रदेश के पहले उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय का पहला शैक्षणिक सत्र 29 अगस्त 2026 से शुरू होगा। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर गौलापार (हल्द्वानी) स्थित विश्वविद्यालय का विधिवत शुभारंभ देव पूजन के साथ किया जाएगा। इससे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन के लिए 122 नियमित पदों के सृजन और तकनीकी व सहायक कर्मचारियों की आउटसोर्स व्यवस्था को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले को प्रदेश की खेल प्रतिभाओं और युवाओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि विश्वविद्यालय के संचालन के लिए स्वीकृत सभी नियमित पदों पर पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सीधी भर्ती की जाएगी। इसके लिए जल्द ही आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब विश्वविद्यालय केवल एक परियोजना नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षकों, प्रशिक्षकों और प्रशासनिक अमले के साथ पूरी तरह कार्यरत शैक्षणिक संस्थान के रूप में प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को नई दिशा देगा। अब तक उत्तराखंड के कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाओं और उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था। कई बार संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पाती थीं। लेकिन खेल विश्वविद्यालय के शुरू होने से अब प्रदेश के खिलाड़ियों को राज्य के भीतर ही आधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, अनुसंधान और उच्च शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि यह विश्वविद्यालय केवल खिलाड़ियों को तैयार करने का केंद्र नहीं होगा, बल्कि खेल शिक्षा, फिटनेस, स्पोर्ट्स साइंस और खेल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी युवाओं को नए अवसर उपलब्ध कराएगा। यहां खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तैयार किया जाएगा, जिससे वे राष्ट्रीय और वैश्विक प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से सुदूर पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को अब अपनी क्षमता साबित करने के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। विश्वविद्यालय उनके लिए ऐसा मंच बनेगा, जहां प्रतिभा को पहचान, प्रशिक्षण और करियर—तीनों एक ही स्थान पर मिलेंगे। इससे खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। रोजगार के दृष्टिकोण से भी यह विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण साबित होगा। 122 नियमित पदों के अलावा तकनीकी और सहायक सेवाओं के लिए भी विभिन्न स्तरों पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे स्थानीय युवाओं को भी लाभ मिलने की उम्मीद है और प्रदेश में खेल आधारित रोजगार का नया वातावरण तैयार होगा। खेल मंत्री ने बताया कि 29 अगस्त, जो हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती के रूप में पूरे देश में राष्ट्रीय खेल दिवस के तौर पर मनाया जाता है, उसी ऐतिहासिक दिन विश्वविद्यालय का पहला सत्र शुरू किया जाएगा। उन्होंने इसे उत्तराखंड की खेल यात्रा का स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा कि यह संस्थान राज्य की खेल संस्कृति को नई पहचान देगा और भविष्य में उत्तराखंड के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। सरकार का मानना है कि खेल विश्वविद्यालय की स्थापना से शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार का ऐसा मजबूत तंत्र विकसित होगा, जो उत्तराखंड को देश के अग्रणी खेल राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।