Mar 11, 2026

सीएम धामी का सुशासन लक्ष्य: देवभूमि परिवार विधेयक से पारदर्शी लाभ वितरण की नई शुरुआत

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उत्तराखंड में कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में “देवभूमि परिवार विधेयक–2026” सदन के पटल पर रखा। इस विधेयक के कानून बनने के बाद प्रदेश में एकीकृत और सत्यापित परिवार-आधारित डेटाबेस “देवभूमि परिवार” की स्थापना की जाएगी, जिससे प्रत्येक परिवार की अलग पहचान यानी परिवार आईडी तैयार होगी।

इस नई व्यवस्था के तहत परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य को परिवार का मुखिया माना जाएगा और उसी के नाम पर परिवार आईडी दर्ज की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाने के साथ परिवार आधारित योजनाओं का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा। वर्तमान में राज्य के अलग-अलग विभाग अपनी योजनाओं के लिए अलग-अलग लाभार्थी डेटाबेस का उपयोग करते हैं। इससे कई बार लाभार्थियों के आंकड़ों में दोहराव, बार-बार सत्यापन की प्रक्रिया और विभागों के बीच समन्वय की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इन वजहों से प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी बाधा आती है। देवभूमि परिवार विधेयक के लागू होने के बाद राज्य में एकीकृत परिवार-स्तरीय डेटा भंडार तैयार होगा, जो सभी विभागों और एजेंसियों के लिए लाभार्थियों से जुड़ी जानकारी का विश्वसनीय स्रोत बनेगा। इससे योजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और लाभ वितरण की प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी हो सकेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “देवभूमि परिवार विधेयक–2026” सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और प्रदेश के नागरिकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।