Jul 16, 2026

50 हजार पौधारोपण अभियान ने हरित विकास के प्रति पंतनगर विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दिखाई

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पंतनगर। उत्तराखंड के पावन लोकपर्व 'हरेला' के शुभ अवसर पर देश में हरित क्रांति की जननी रहे गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण का एक बेहद विराट संदेश दिया गया है। विश्वविद्यालय परिसर में 15 दिवसीय 'हरित यज्ञ' अभियान का भव्य और ऐतिहासिक शुभारंभ किया गया। इस महा-अभियान के तहत विश्वविद्यालय ने न केवल 50 हजार पौधों को रोपने, बल्कि उनके पूर्ण संरक्षण का भी महासंकल्प लिया है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) रहे। उन्होंने इस अभियान को पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। इस गरिमापूर्ण समारोह का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने तराई भवन परिसर में अत्यंत श्रद्धा के साथ रुद्राक्ष का पौधा लगाकर इस 15 दिवसीय 'हरित यज्ञ' का विधिवत शंखनाद किया। अभियान की शुरुआत करने के बाद राज्यपाल ने गांधी हॉल में आयोजित आम की विभिन्न प्रजातियों की एक बेहद आकर्षक प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के शोध कार्यों की सराहना की। मंच पर उनके साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तराखंड प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र तथा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप भी गरिमामयी उपस्थिति में मौजूद रहे। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि हरेला देवभूमि का केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारी मातृभूमि, प्रकृति और अन्नदाता किसानों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक जीवंत माध्यम है। राज्यपाल ने आधुनिक तकनीकों के समावेश पर विशेष बल देते हुए कहा कि भविष्य की खेती को बचाने के लिए हमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा साइंस, सटीक जल संरक्षण और कार्बन प्रबंधन जैसी तकनीकों को अपनाना होगा। उन्होंने उत्तराखंड की वन संपदा को बचाने में यहां की मातृशक्ति (महिलाओं) के ऐतिहासिक और बेजोड़ योगदान को भी रेखांकित किया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने कुलाधिपति को आश्वस्त करते हुए कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय आज भी कृषि अनुसंधान और नवाचारों में देश का मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने 'हरित यज्ञ' की रूपरेखा साझा करते हुए बताया इस अभियान के तहत अगले 15 दिनों में विश्वविद्यालय परिसर, अनुसंधान केंद्रों, विभिन्न जिलों में स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों और विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों में 50 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। कुलपति ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक रोपे गए पौधे की जियो-टैगिंग और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी तय की गई है ताकि वे वृक्ष बन सकें। पंतनगर विश्वविद्यालय का यह 'हरित यज्ञ' केवल सरकारी औपचारिकता न रहकर एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। इसमें छात्र-छात्राओं, वैज्ञानिकों, किसानों और स्थानीय निवासियों को सीधे जोड़ा जा रहा है। कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान से निकलने वाले शोध और तकनीकी संदेश देश के अन्य हिस्सों के लिए भी नजीर बनेंगे। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को एक हरित, स्वच्छ और समृद्ध वातावरण सौंपने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।