Aug 14, 2026

राज्यपाल की कुलपतियों को सख्त हिदायत: सिर्फ डिग्री बांटना मकसद न हो, शोध और नवाचार से गढ़ें 'विकसित भारत 2047' का भविष्य

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देहरादून। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों को भविष्य की आधुनिक तकनीकों और शोध पर ध्यान केंद्रित करने का स्पष्ट संदेश दिया है। गुरुवार को लोक भवन में राज्य के स्व-वित्तपोषित (प्राइवेट) विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ आयोजित दूसरे चरण की समीक्षा बैठक में राज्यपाल ने साफ कहा कि विश्वविद्यालयों का लक्ष्य केवल डिग्रियां बांटना नहीं होना चाहिए, बल्कि युवाओं को रोजगार, उद्योग, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए पूरी तरह सक्षम बनाना होना चाहिए।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने विश्वविद्यालयों से शिक्षा को केवल डिग्री देने तक सीमित न रखने और उसे शोध, नवाचार, रोजगार तथा राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को भविष्य की जरूरतों और तकनीकी बदलावों के अनुरूप युवाओं को तैयार करना होगा। विश्वविद्यालयों को ऐसे शोध विषय चुनने चाहिए, जिनका सीधा लाभ उत्तराखंड और यहां के समाज को मिल सके। राज्यपाल ने गुरुवार को लोक भवन में उत्तराखंड के स्व वित्तपोषित निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ आयोजित दूसरे चरण की बैठक में यह बात कही। बैठक में 14 निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया। कुलपतियों ने अपने-अपने विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों, भविष्य की योजनाओं और सामने आ रही चुनौतियों की जानकारी राज्यपाल को दी। बैठक में अनुसंधान को बढ़ावा देने, पेटेंट संस्कृति विकसित करने, पेटेंट के व्यावसायीकरण, उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच सहयोग, साझा शोध व्यवस्था और विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाला शोध केवल शोध पत्र प्रकाशित करने या पेटेंट दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शोध के परिणामों को व्यावसायिक रूप देने और समाज तक पहुंचाने की दिशा में भी काम किया जाना जरूरी है। उन्होंने शोध, प्रकाशन और शोध उद्धरण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इसलिए विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को रोजगार के साथ उद्योग, समाज और राष्ट्र की जरूरतों के अनुरूप सक्षम बनाएं। नई शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में लगातार बदलाव लाने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा कि 21वीं सदी में शिक्षा के सामने नई तकनीकों और पर्यावरणीय चुनौतियों का नया दौर है। मेटावर्स, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष तकनीक, साइबर तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे क्षेत्रों में अध्ययन और अनुसंधान को बढ़ावा देना होगा। विश्वविद्यालयों को इन उभरते क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करने के साथ विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी देना चाहिए। उन्होंने युवाओं को सही दिशा देना वर्तमान समय की बड़ी चुनौती बताया। नशे जैसी सामाजिक समस्याओं से निपटने के लिए विश्वविद्यालयों में सकारात्मक और नशामुक्त वातावरण विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, संस्कार, परंपराओं और चरित्र निर्माण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए कि वे उत्तराखंड की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शोध के विषय तय करें। उन्होंने कहा कि पहाड़ की वास्तविक समस्याओं और संभावनाओं पर होने वाला शोध राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। साझा शोध, संसाधनों के उपयोग और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान से प्रदेश में मजबूत अकादमिक व्यवस्था विकसित की जा सकती है। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को अपनी पहचान और विरासत को संरक्षित करने के लिए संस्थापक और संस्थान के इतिहास पर पुस्तक प्रकाशित करने, विश्वविद्यालय की यात्रा पर फिल्म बनाने तथा कॉफी टेबल बुक तैयार करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों का वास्तविक महत्व तभी है, जब उनका लाभ विद्यार्थियों, समाज, उद्योग और प्रदेश के विकास तक पहुंचे। उच्च शिक्षा संस्थानों को भविष्य की चुनौतियों को अवसर में बदलने के लिए अभी से शोध और नवाचार की मजबूत नींव तैयार करनी होगी।