May 07, 2026

विकास की राह में जल जीवन मिशन: उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा हुआ मजबूत

post-img

उत्तराखंड के दूरस्थ पहाड़ों और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले गांवों में रहने वाले परिवारों के लिए अब 'शुद्ध पानी' एक सपना नहीं बल्कि हकीकत बन चुका है। केंद्र और राज्य सरकार के 'जल जीवन मिशन' ने राज्य में एक नई क्रांति का सूत्रपात किया है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड ने मिशन के तहत 98 प्रतिशत से अधिक कवरेज हासिल कर लिया है, जो आपदा संवेदनशील और कठिन रास्तों वाले इस हिमालयी राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। राज्य के लगभग 14.48 लाख ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। इस दिशा में कार्य करते हुए शासन ने अब तक 14.20 लाख परिवारों को उनके घर पर ही नल कनेक्शन उपलब्ध करा दिया है। इस विशाल कार्य को संपन्न करने के लिए प्रदेशभर में 16,500 से अधिक पेयजल योजनाएं स्वीकृत की गई थीं, जिनमें से अधिकांश का कार्य पूर्ण हो चुका है और शेष अंतिम चरण में हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए अब सरकार 'जल जीवन मिशन 2.0'  पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसी साल अप्रैल 2026 में केंद्र और उत्तराखंड सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते का उद्देश्य न केवल नल कनेक्शन देना है, बल्कि पानी की गुणवत्ता और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का समावेश करना भी है।

उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति हमेशा से ही बड़ी परियोजनाओं के लिए चुनौती रही है। पहाड़ी ढलानों, आपदा की संवेदनशीलता और दुर्गम रास्तों के बावजूद इंजीनियरों और श्रमिकों ने इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई मौकों पर कहा है कि यह मिशन केवल पाइपलाइन बिछाने का कार्य नहीं है, बल्कि यह हमारी माताओं-बहनों को पानी के लिए मीलों पैदल चलने के कष्ट से मुक्ति दिलाने का अभियान है। केवल नल पहुँचाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन नलों में पानी का निरंतर प्रवाह बना रहे, इसके लिए सरकार स्रोत संरक्षण पर भी विशेष कार्य कर रही है। मिशन के तहत 6,500 से अधिक जल स्रोतों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण किया जा रहा है। 1000 गांवों में पारंपरिक जल स्रोतों (धारा, नौला) के पुनर्जीवन का कार्य सफलतापूर्वक चल रहा है। यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बना रहा है। शुद्ध पेयजल मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों में कमी आई है, जिससे ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जल जीवन मिशन के माध्यम से उत्तराखंड सरकार ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो हिमालय की ऊंचाइयां भी विकास की राह में बाधा नहीं बन सकतीं।