तेहरान/वॉशिंगटन। आधुनिक युद्ध और सैन्य तकनीक के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। अमेरिकी नौसेना की एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मानवरहित ड्रोन बोट ने समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त हुए अमेरिकी सेना के AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर के दो पायलटों को सुरक्षित बचाकर दुनिया को चौंका दिया है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार यह पहली बार है जब किसी बिना चालक दल वाली समुद्री नाव का उपयोग वास्तविक सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन में सैनिकों को पानी से सुरक्षित निकालने के लिए किया गया है। यह घटना ओमान के तट के पास और दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई। अमेरिकी सेना का AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर नियमित गश्त पर था, तभी वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद हेलीकॉप्टर में सवार दोनों पायलट समुद्र में फंस गए और करीब दो घंटे तक पानी में तैरते रहे।
AI तकनीक बनी जीवन रक्षक
घटना की सूचना मिलते ही अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े की टास्क फोर्स-59 सक्रिय हो गई। यह अमेरिकी नौसेना की पहली ऑपरेशनल AI और ड्रोन टास्क फोर्स मानी जाती है, जो आधुनिक तकनीक और स्वायत्त प्रणालियों के जरिए समुद्री अभियानों को अंजाम देती है। टास्क फोर्स ने तुरंत अपनी अत्याधुनिक मानवरहित ड्रोन बोट ‘सारोनिक कॉर्सियर’ को बचाव अभियान के लिए रवाना किया। करीब 24 फुट लंबी यह हाई-टेक बोट अत्याधुनिक सेंसर, कैमरों और AI सिस्टम से लैस है। रात के अंधेरे और चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों के बावजूद ड्रोन बोट ने दोनों पायलटों का सटीक पता लगाया और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में सफलता हासिल की।
दो घंटे में पूरा हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिमोथी हॉकिन्स के अनुसार, ड्रोन बोट ने पानी में मौजूद चालक दल के सदस्यों को खोजा और सुरक्षित निकाला। इसके बाद एक रेस्क्यू हेलीकॉप्टर ने दोनों सैनिकों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित सैन्य ठिकाने तक पहुंचाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों सैनिकों को लगभग दो घंटे के भीतर सुरक्षित बचा लिया गया और उनकी हालत स्थिर है। साथ ही दुर्घटना के कारणों की जांच जारी है।
ड्रोन तकनीक की बड़ी सफलता
वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक यह समुद्री बचाव अभियानों में बिना चालक दल वाले समुद्री वाहन (USV) के इस्तेमाल का पहला ज्ञात मामला माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफल ऑपरेशन ने भविष्य के सैन्य और नागरिक बचाव अभियानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे ड्रोन सिस्टम न केवल मानव जीवन को जोखिम से बचाते हैं, बल्कि दुर्गम और खतरनाक परिस्थितियों में भी तेज और सटीक कार्रवाई करने में सक्षम होते हैं। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियां अब AI आधारित स्वायत्त प्रणालियों पर तेजी से निवेश कर रही हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच घटना
घटना ऐसे समय हुई है जब मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। दुर्घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हेलीकॉप्टर को ईरान ने मार गिराया था। इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। हालांकि इस दावे को लेकर विभिन्न स्तरों पर जांच और विश्लेषण जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि चाहे दुर्घटना का कारण जो भी हो, लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि भविष्य के युद्ध और सैन्य अभियान केवल हथियारों से नहीं, बल्कि AI और स्वायत्त तकनीकों की क्षमता से भी तय होंगे।
सैन्य इतिहास में दर्ज हुआ नया रिकॉर्ड
ड्रोन बोट द्वारा समुद्र में फंसे सैनिकों को सुरक्षित बचाने की यह घटना सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह ऑपरेशन इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में युद्धक्षेत्र, निगरानी, खोज और बचाव अभियानों में AI आधारित प्रणालियां मानव भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने वाली हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह ड्रोन विमानों ने हवाई अभियानों की तस्वीर बदल दी, उसी तरह मानवरहित समुद्री वाहन भविष्य में नौसैनिक अभियानों और आपदा राहत कार्यों का स्वरूप बदल सकते हैं।