देहरादून। उत्तराखंड का चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राजनीतिक भूचाल का केंद्र बन गया है। इस मामले से जुड़े कथित वीआईपी की एक संवैधानिक पद (राज्यपाल) पर हालिया नियुक्ति के बाद कांग्रेस पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सड़कों पर मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली में इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने के विरोध में आज कांग्रेस ने राजधानी देहरादून में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष समेत कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया है।
चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। दिल्ली में अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने की घटना के विरोध में कांग्रेस ने देहरादून में मोर्चा खोल दिया। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने लोकभवन की ओर कूच कर अंकिता को न्याय दिलाने, मामले में कथित वीआईपी की पहचान सार्वजनिक करने और उससे जुड़ी नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और हंगामे के बीच पुलिस ने कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। प्रदर्शन से पहले कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने संयुक्त प्रेस वार्ता की। इसके बाद कांग्रेस नेता लोकभवन पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि वे ज्ञापन सौंपने आए थे, लेकिन उनका ज्ञापन लेने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। इसी बीच प्रदर्शन तेज हो गया और पुलिस ने नेताओं को हिरासत में ले लिया। कांग्रेस का आरोप है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े सवालों का अब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। पार्टी नेताओं ने सरकार की ओर से सीबीआई जांच की संस्तुति किए जाने के बावजूद मामले में उठ रहे सवालों को लेकर नाराजगी जताई। कांग्रेस ने कथित वीआईपी की पहचान सार्वजनिक करने और उससे जुड़ी नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि शुरुआत से ही इस मामले में जनता को गुमराह किया गया। उन्होंने कहा कि कथित वीआईपी को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए और अब इस प्रकरण ने उत्तराखंड के स्वाभिमान का सवाल खड़ा कर दिया है। गोदियाल ने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए प्रदेश की मातृशक्ति को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मामले को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं और इससे उत्तराखंड की छवि प्रभावित हो रही है। कांग्रेस ने सरकार से मांग की कि मामले से जुड़े सभी सवालों का पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाए। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अंकिता भंडारी प्रकरण को उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़ा मामला बताया। उन्होंने कहा कि अंकिता के परिजन लंबे समय से कथित वीआईपी की पहचान को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनके अनुसार, इस मामले में न्याय सुनिश्चित करना केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। हरीश रावत ने दिल्ली में अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने की निंदा करते हुए कहा कि उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने सीबीआई जांच के उद्देश्य पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कथित वीआईपी से जुड़े सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि अंकिता हत्याकांड में शुरुआत से ही कई सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने रिसॉर्ट में साक्ष्य मिटाने की कोशिश किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कथित वीआईपी की पहचान सामने आनी चाहिए। उन्होंने जांच की प्रगति को लेकर भी सवाल उठाए और मामले में पारदर्शिता की मांग की। वहीं, हरक सिंह रावत ने दिल्ली में अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने आत्मदाह की चेतावनी भी दी, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्मा गया। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक मामले से जुड़े सवालों का जवाब नहीं मिलता और कथित वीआईपी की पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती। पार्टी ने इसे केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा, न्याय और प्रदेश की प्रतिष्ठा से जुड़ा सवाल बताया। दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस के आरोपों और मांगों पर सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। मामले की जांच की वास्तविक स्थिति और कथित वीआईपी से जुड़े दावों की पुष्टि जांच एजेंसियों के निष्कर्षों से ही हो सकेगी। फिलहाल देहरादून में हुए प्रदर्शन और वरिष्ठ नेताओं की हिरासत के बाद अंकिता भंडारी प्रकरण एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है।