Aug 05, 2026

नंदा देवी यात्रा के पड़ाव गांवों में सफाई और सुरक्षा का बनेगा विशेष प्लान; प्रशासन को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

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थराली। उत्तराखंड की लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मां नंदा देवी की वार्षिक लोक जात यात्रा का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। बधाण क्षेत्र के सयानों और केंद्रीय समिति ने वर्ष 2026 की नंदा देवी लोक जात यात्रा का दिन-पट्टा जारी कर दिया है। तय कार्यक्रम के अनुसार यात्रा 5 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर तक चलेगी। इस बार भी मां नंदा की डोली वेदनी बुग्याल तक पहुंचेगी और विशेष पूजा-अर्चना के बाद कैलाश विदाई की परंपरा निभाते हुए वापस सिद्धपीठ देवराड़ा लौटेगी।

बुधवार को नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा में मंदिर समिति के अध्यक्ष भूवन हटवाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यात्रा की रूपरेखा पर अंतिम मुहर लगाई गई। बैठक में मां नंदा देवी राजराजेश्वरी समिति के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील रावत और सचिव पृथ्वीपाल सिंह बुटोला सहित कई पदाधिकारी और क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे। समिति ने बताया कि वर्ष 2027 में ऐतिहासिक नंदा देवी राजजात यात्रा का आयोजन प्रस्तावित है। इसी कारण इस वर्ष आयोजित होने वाली वार्षिक लोक जात यात्रा को भी भव्य और सुव्यवस्थित रूप देने का निर्णय लिया गया है। समिति के अनुसार, थराली, देवराड़ा, कुलसारी और वांण में हुई बैठकों तथा कुरूड़ के गौड़ ब्राह्मणों की सहमति के बाद इस वर्ष यात्रा का दिन-पट्टा देवराड़ा से जारी किया गया है। पहले जारी कार्यक्रम में आंशिक संशोधन भी किया गया है, लेकिन यात्रा की परंपरा और धार्मिक स्वरूप यथावत रहेगा। जारी कार्यक्रम के अनुसार 5 सितंबर को यात्रा नंदानगर ब्लॉक स्थित नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से रवाना होगी और पहले दिन चरबंग में रात्रि विश्राम करेगी। इसके बाद यात्रा क्रमशः मदकोट, उस्तोली, भेटी, सोल डुंग्री, सूना, चेपड़ो, धरातल्ला, इच्छोली, फल्दियागांव, मुंदोली, लोहाजंग और वांण जैसे पड़ावों से गुजरते हुए 18 सितंबर की सुबह वेदनी बुग्याल पहुंचेगी। वेदनी बुग्याल में मां नंदा की विशेष पूजा-अर्चना और पारंपरिक जात संपन्न होने के बाद कैलाश विदाई की धार्मिक रस्म अदा की जाएगी। इसके साथ ही डोली की वापसी यात्रा शुरू होगी। वापसी के दौरान यात्रा बांक, ल्वाणी, उलंग्रा, बेराधार, गोठिंड़ा, कुराड़ और ढुंगाखोली सहित विभिन्न पड़ावों से होकर 25 सितंबर को सिद्धपीठ देवराड़ा पहुंचेगी। यहां विधि-विधान से पूजा के बाद मां नंदा की डोली अगले छह माह के लिए मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होगी। बैठक में यात्रा मार्ग, रात्रि विश्राम स्थलों, श्रद्धालुओं की सुरक्षा, पेयजल, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। समिति ने प्रशासन और स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, इसलिए सभी तैयारियां समय से पूरी की जाएंगी। उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल नंदा देवी लोक जात यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह राज्य की लोक संस्कृति, रीति-रिवाज और सामुदायिक एकता का भी अनूठा उदाहरण मानी जाती है। ऐसे में 2027 की ऐतिहासिक राजजात से पहले होने वाली इस वर्ष की यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।