Jul 11, 2026

सेवा, सुशासन और समर्पण पखवाड़े से हजारों लोगों को लाभ, 23 विभाग दे रहे सेवाएं

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है और सरकार का यह परम दायित्व है कि वह पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ आम नागरिक के कल्याण के लिए काम करे। इसी मूल सोच के साथ राज्य सरकार ने ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान की शुरुआत की है। अब राज्य के किसी भी नागरिक को अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं या प्रमाण पत्रों के लिए सरकारी दफ्तरों और सचिवालय के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं, बल्कि सरकार और प्रशासन खुद चलकर जनता के बीच पहुंच रहे हैं। सहसपुर में आयोजित सेवा, सुशासन और समर्पण पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सरकार की नई कार्य संस्कृति का खाका देश और प्रदेश के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल एक सामान्य सरकारी औपचारिकता या कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के शासन तंत्र और ब्यूरोक्रेसी की कार्य संस्कृति में आए एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है। सीएम धामी ने कहा हमारी सरकार ने यह कड़ा संकल्प लिया है कि शासन केवल फाइलों, सचिवालय और बंद कमरों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक खुद पहुंचेगी। पहले आम नागरिक अपनी जायज मांगों के लिए दफ्तरों की खाक छानता था, जबकि आज वरिष्ठ अधिकारी स्वयं गांवों और कस्बों में चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं और मौके पर ही उनका निस्तारण कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अभियान की सफलता के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' अभियान के पहले ही चरण में प्रदेशभर में लगभग 65 दिनों के भीतर 700 से अधिक महा-शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में 6 लाख से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। सबसे बड़ी बात यह रही कि इन शिविरों के माध्यम से 39 हजार से अधिक पात्र लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मौके पर ही उपलब्ध कराया गया। इस कदम ने सरकार और आम जनता के बीच की दूरी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। वर्तमान में प्रदेशभर में चल रहे 'सेवा, सुशासन और समर्पण पखवाड़ा' की खूबियां बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन शिविरों में 23 अलग-अलग विभागों की सेवाएं एक साथ एक ही पंडाल के नीचे उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे आम नागरिकों को निम्नलिखित सुविधाएं बेहद सरलता से मिल रही हैं। मुख्यमंत्री ने मंच से ही अधिकारियों को कड़ी हिदायत देते हुए कहा कि शिविरों में प्राप्त होने वाली जनशिकायतों का केवल समयबद्ध ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा, "केवल शिकायत को डायरी में दर्ज कर लेना पर्याप्त नहीं है, प्रत्येक समस्या का अंतिम समाधान ही इस सरकार की प्राथमिकता है। अधिकारी संवेदनशीलता के साथ जनता का विश्वास मजबूत करें। सहसपुर के इस भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, सहसपुर के क्षेत्रीय विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, भाजपा जिलाध्यक्ष मीता सिंह, हरबर्टपुर की पालिकाध्यक्ष नीरू देवी सहित विनय रूहेला, पुनीत मित्तल, धीरेन्द्र पवार, ओमवीर राघव, भुवन विक्रम डबराल, अर्चना रावत, स्वराज विध्वान और नवीन ठाकुर मुख्य रूप से उपस्थित रहे। प्रशासनिक मोर्चे पर जिलाधिकारी आशीष चौहान, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी और अभिनव शाह सहित तमाम विभागों के उच्चाधिकारी और हजारों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण व महिलाएं मौजूद रहीं।