देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में सोमवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। देहरादून जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष और वर्ष 2022 में चकराता विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी रहे रामशरण नौटियाल ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। उन्होंने नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी का दामन थामा। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले हुए इस घटनाक्रम ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। रामशरण नौटियाल के कांग्रेस में शामिल होने के दौरान कांग्रेस महासचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने उनका स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि उनके राजनीतिक अनुभव से संगठन को मजबूती मिलेगी।
रामशरण नौटियाल का राजनीतिक सफर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़ा रहा है। वह देहरादून जिला पंचायत के अध्यक्ष रह चुके हैं। वर्ष 2014 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें चकराता विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया था। चकराता क्षेत्र उत्तराखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसे में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने के उनके फैसले को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उनके इस निर्णय का चकराता या प्रदेश की चुनावी राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन आगामी राजनीतिक गतिविधियों और स्थानीय समीकरणों के आधार पर ही किया जा सकेगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रामशरण नौटियाल ने भाजपा से इस्तीफा देते समय पार्टी में सम्मान की कमी और संगठनात्मक कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई थी। यदि इन कारणों को उनके फैसले की प्रमुख वजह माना जाए, तो यह घटनाक्रम राजनीतिक दलों के भीतर कार्यकर्ताओं और नेताओं की अपेक्षाओं तथा संगठनात्मक संवाद के महत्व को भी सामने लाता है। हालांकि, उनके भाजपा छोड़ने के पीछे की परिस्थितियों और सभी कारणों को लेकर उनका विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने का निर्णय लिया है। रामशरण नौटियाल के कांग्रेस में शामिल होने पर पार्टी नेताओं ने उनके अनुभव और सहयोग का उल्लेख किया। कांग्रेस के लिए यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दल अपनी संगठनात्मक तैयारियों और जनसंपर्क गतिविधियों को मजबूत करने में जुटे हैं। नौटियाल की कांग्रेस में वापसी से पार्टी को चकराता समेत देहरादून जिले के कुछ क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव उनके आगे के राजनीतिक कार्यक्रमों, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और क्षेत्र में उनकी सक्रियता पर निर्भर करेगा। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले नेताओं का दल बदलना राजनीतिक समीकरणों को चर्चा में ला सकता है। रामशरण नौटियाल का भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होना भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा की प्रतिक्रिया और कांग्रेस में उनकी आगे की भूमिका पर निगाहें रहेंगी। रामशरण नौटियाल के पाला बदलने से उत्तराखंड की राजनीति में नई चर्चा जरूर शुरू हुई है, लेकिन इसका चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल कांग्रेस ने उनका स्वागत किया है, जबकि उनके इस फैसले के पीछे बताई जा रही संगठनात्मक नाराजगी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी है।