Aug 08, 2026

टौंस नदी पुल मामला: PWD ने हिमालयन कंस्ट्रक्शन का पंजीकरण निलंबित किया

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देहरादून। प्रेमनगर-नंदा की चौकी के पास टौंस नदी पर बने नए पुल की एप्रोच रोड उद्घाटन के महज 16 दिन बाद धंसने के मामले में उत्तराखंड शासन और लोक निर्माण विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले की प्रारंभिक जांच के बाद शासन ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, निर्माण कार्य से जुड़ी मैसर्स हिमालयन कंस्ट्रक्शन के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई करते हुए उसका पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। कंपनी को अग्रिम आदेशों तक उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग की निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने के मामले में अब तकनीकी जांच के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। मामला देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रेमनगर से आगे नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर बने नए पुल से जुड़ा है। पुल का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को किया गया था। पुल के उद्घाटन के महज 16 दिन बाद 28 जुलाई की सुबह क्षेत्र में हुई भारी बारिश और फ्लैश फ्लड के बाद पुल की एप्रोच रोड का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। एप्रोच रोड धंसने के बाद सड़क के बीचोंबीच बड़ा गड्ढा बन गया। घटना सामने आने के बाद पुल के निर्माण, डिजाइन, गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे। मामला शासन तक पहुंचा तो लोक निर्माण विभाग को तत्काल प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए गए। यह पुल देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-72 पर टौंस नदी के किमी 143 में उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के समीप स्थित है। यहां पहले से क्षतिग्रस्त पुल के पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण का कार्य कराया जा रहा था। इस कार्य का अनुबंध संख्या 36/SE-09/2025-26, दिनांक 31 जनवरी 2026 के तहत मैसर्स हिमालयन कंस्ट्रक्शन, 250 सारथी विहार, देहरादून को दिया गया था। 28 जुलाई को हुई भारी बारिश के बाद टौंस नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ा और फ्लैश फ्लड की स्थिति बनी। इसके बाद पुल की एप्रोच रोड को नुकसान पहुंचा। विभागीय जांच में Upstream Protection Wall के नीचे Scouring यानी भारी कटाव को एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने का प्रमुख कारण बताया गया। शासन की प्रारंभिक जांच में पुल के डिजाइन और तकनीकी प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आए हैं। जांच में पाया गया कि डिजाइन कंसल्टेंट की ओर से River Diversion Work का डिजाइन तैयार नहीं किया गया था। यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नदी पर किसी पुल के निर्माण के दौरान नदी के प्रवाह और निर्माण क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ी तकनीकी व्यवस्था का सही तरीके से डिजाइन और क्रियान्वयन जरूरी होता है। प्रारंभिक जांच में इसी स्तर पर खामियां सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे और उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

तीन इंजीनियर तत्काल प्रभाव से निलंबित
जांच रिपोर्ट के बाद शासन ने जिम्मेदारी तय करते हुए लोक निर्माण विभाग के तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें संबंधित अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं। तीनों अधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग कार्यालय आदेश जारी करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। प्रारंभिक जांच में डिजाइन से जुड़ी तकनीकी कमियों के साथ निर्माण कार्य की निगरानी में भी लापरवाही सामने आने की बात कही गई है। शासन की इस कार्रवाई को निर्माण कार्यों में तकनीकी गुणवत्ता और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हिमालयन कंस्ट्रक्शन पर भी गिरी गाज
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्य करने वाली कंपनी मैसर्स हिमालयन कंस्ट्रक्शन के खिलाफ भी कड़ा कदम उठाया है। विभाग ने कंपनी का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी को अग्रिम आदेशों तक लोक निर्माण विभाग, उत्तराखंड की निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद अब मामले में सिर्फ अधिकारियों की जवाबदेही ही नहीं, बल्कि निर्माण एजेंसी की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।