देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की विदाई का समय करीब आते ही मौसम एक बार फिर करवट लेने की तैयारी में है। बीते कुछ दिनों से प्रदेश में मौसम शुष्क बना हुआ है और मैदानी क्षेत्रों में दिन के समय तेज धूप के कारण तापमान बढ़ रहा है, लेकिन अब मानसून विदाई से पहले पहाड़ों पर एक बार फिर अपने तेवर दिखा सकता है। मौसम विभाग ने 21 से 26 सितंबर तक राज्य के कई पर्वतीय जिलों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम के इस बदलाव के चलते पहाड़ी क्षेत्रों में आवाजाही करने वालों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में बादल सक्रिय रह सकते हैं। विशेष रूप से चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, नैनीताल और चंपावत के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश के साथ गर्जन की संभावना है। हालांकि फिलहाल भारी बारिश को लेकर कोई व्यापक चेतावनी नहीं बताई गई है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदलने की प्रकृति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर सावधानी जरूरी होगी। प्रदेश में मानसून की विदाई की संभावित अवधि भी नजदीक आ गई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 25 से 30 सितंबर के बीच उत्तराखंड से मानसून की विदाई होने की संभावना है। ऐसे में अगले कुछ दिन मानसून के अंतिम प्रभाव वाले माने जा रहे हैं। मौसम में आ रहे इस बदलाव से साफ है कि मानसून पूरी तरह विदा होने से पहले पर्वतीय क्षेत्रों में एक-दो दौर बारिश का असर दिखा सकता है।
पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत साफ और शुष्क रहा है। मैदानी जिलों में दिन के समय तेज धूप निकलने से गर्मी का असर फिर बढ़ने लगा है। वहीं ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान सामान्य के आसपास बना हुआ है। मौसम के इस अंतर के कारण आने वाले दिनों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज अलग-अलग दिखाई दे सकता है। राजधानी देहरादून में भी तापमान ने एक बार फिर बढ़त दर्ज की है। रविवार को दून का अधिकतम तापमान 33.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब चार डिग्री अधिक रहा। हालांकि रात का न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य के आसपास दर्ज किया गया। इससे दिन और रात के तापमान में अंतर साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश के अन्य मैदानी क्षेत्रों में भी दिन के समय धूप के कारण गर्मी महसूस की जा रही है। दूसरी ओर पर्वतीय इलाकों में बादलों की आवाजाही और संभावित बारिश के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बारिश का यह संभावित दौर भले ही सीमित क्षेत्रों में रहने का अनुमान है, लेकिन पहाड़ी जिलों में मौसम का अचानक बदलना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है। बारिश के दौरान सड़क पर फिसलन, दृश्यता कम होने और संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही सफर करने की सलाह दी गई है। विशेषकर चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जैसे पर्वतीय जिलों में बारिश के दौरान स्थानीय परिस्थितियों पर नजर रखना जरूरी होगा। चारधाम और अन्य पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए भी मौसम की जानकारी महत्वपूर्ण रहेगी। उत्तराखंड में मानसून की विदाई की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन विदाई से पहले मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। 21 से 26 सितंबर तक पहाड़ों में बारिश और गर्जन का दौर प्रदेश में मानसून की अंतिम सक्रियता का संकेत दे रहा है। इसके बाद 25 से 30 सितंबर के बीच मानसून के प्रदेश से विदा होने की संभावना है। फिलहाल मैदानी क्षेत्रों में धूप और पहाड़ों में बादलों-बारिश का मिला-जुला असर देखने को मिल सकता है।