Sep 12, 2026

सुधार की पटरी पर उत्तराखंड: टैक्स चोरों पर नकेल से बढ़ा जीएसटी कलेक्शन,16% की छलांग

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देहरादून। देश के छोटे और पहाड़ी राज्यों के लिए राजस्व जुटाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है, लेकिन उत्तराखंड ने अपनी मजबूत वित्तीय नीतियों, सख्त निगरानी और प्रशासनिक मुस्तैदी के बल पर एक मिसाल कायम की है। राज्य के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रहण में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के अगस्त महीने में प्रदेश के जीएसटी राजस्व में पिछले वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा न केवल राज्य की आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि टैक्स चोरी पर कसा गया शिकंजा अब रंग लाने लगा है।

प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए राजस्व के मोर्चे से राहत देने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रदेश में वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी संग्रहण में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के अगस्त माह में राज्य को जीएसटी से 920 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 780 करोड़ रुपये था। यानी एक साल में अगस्त के जीएसटी संग्रहण में करीब 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। राजस्व में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है, जब राज्य सरकार के सामने अपने निर्धारित राजस्व लक्ष्य को हासिल करने की चुनौती बनी हुई है। उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में जीएसटी से 12,200 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य कर विभाग अब केवल रिटर्न जमा होने का इंतजार करने के बजाय कारोबार के वास्तविक आंकड़ों का विश्लेषण कर रहा है। जीएसटी रिटर्न, ई-वे बिल और वास्तविक कारोबार के आंकड़ों के बीच मिलान कर टैक्स चोरी की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। प्रदेश में जीएसटी के तहत पंजीकृत व्यापारियों और फर्मों की संख्या बढ़कर 2.15 लाख से अधिक हो चुकी है। इसका सीधा अर्थ है कि राज्य में कारोबार का एक बड़ा हिस्सा अब औपचारिक कर व्यवस्था के दायरे में आ चुका है। हालांकि पंजीकरण बढ़ने के साथ फर्जी पंजीकरण और टैक्स चोरी की नई चुनौती भी सामने आई है। विभागीय जांच में ऐसे मामलों का पता चला है, जहां कागजों पर फर्म पंजीकृत हैं, लेकिन मौके पर उनका वास्तविक कारोबार नहीं पाया गया। आरोप है कि ऐसी फर्मों के नाम पर माल की खरीद दिखाकर कुछ कारोबारी इनपुट टैक्स क्रेडिट का अनुचित लाभ उठाते हैं। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है और ईमानदारी से कारोबार करने वाले करदाताओं के सामने भी असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति पैदा होती है। यही वजह है कि अब विभाग फर्जी फर्मों और संदिग्ध कारोबारियों पर विशेष निगरानी कर रहा है। डिजिटल डेटा के बढ़ते इस्तेमाल ने कर प्रशासन को भी पहले की तुलना में अधिक सक्षम बनाया है। ई-वे बिल और जीएसटी रिटर्न के आंकड़ों के जरिए कारोबार की वास्तविक तस्वीर सामने लाने की कोशिश की जा रही है। अगस्त में जहां जीएसटी संग्रहण में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं आईजीएसटी संग्रहण में कमी दर्ज हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अगस्त में उत्तराखंड से 340 करोड़ रुपये का आईजीएसटी प्राप्त हुआ था। इस वर्ष टैक्स स्लैब में हुए बदलाव के चलते आईजीएसटी में कुछ कमी आई है। ऐसे में केवल एक घटक के आंकड़े को देखकर राजस्व की पूरी तस्वीर का आकलन करना उचित नहीं होगा। कुल जीएसटी संग्रहण में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि राज्य कर विभाग की निगरानी और अनुपालन सुधार की कोशिशों का असर दिखाई दे रहा है। हालांकि इसे स्थायी राजस्व सुधार में बदलने के लिए लगातार निगरानी जरूरी होगी। किसी भी राज्य के लिए कर संग्रहण केवल सरकारी खजाने का आंकड़ा नहीं होता। यही राजस्व सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे जैसी योजनाओं के लिए वित्तीय आधार तैयार करता है। इसलिए जीएसटी संग्रहण में बढ़ोतरी उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण है। राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन के अनुसार अगस्त में जीएसटी संग्रहण में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। अब चुनौती यह है कि राजस्व वृद्धि केवल कुछ महीनों की उपलब्धि बनकर न रह जाए। फर्जी फर्मों पर कार्रवाई, वास्तविक कारोबार की पहचान और ईमानदार करदाताओं को प्रोत्साहन के साथ यदि डिजिटल निगरानी को और मजबूत किया जाता है तो उत्तराखंड न केवल 12,200 करोड़ रुपये के लक्ष्य तक पहुंच सकता है, बल्कि आने वाले वर्षों में अपने राजस्व आधार को और मजबूत कर सकता है।