Jun 22, 2026

नगरासू घटनाक्रम पर नजर, धामी और भगवंत मान ने शांति बनाए रखने पर दिया जोर

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देहरादून। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित नगरासू गुरुद्वारे में हथियारों के साथ डेरा डाले निहंग सिखों का मामला अब बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल हो गया है। इस पूरे गतिरोध पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने संज्ञान लेते हुए सोमवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर विशेष बातचीत की। सीएम मान ने मुख्यमंत्री धामी से कहा कि गुरुद्वारे में मौजूद निहंग सिखों की जो भी मांगें हैं, उन्हें सुनना और शांति से समाधान निकालना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता खुला रखने और समझदारी से काम लेने की अपील की। इसके साथ ही पंजाब के सीएम ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उत्तराखंड सरकार को हर संभव मदद का भरोसा देते हुए कहा कि पंजाब सरकार भी सिख धर्मगुरुओं के लगातार संपर्क में है।

पंजाब के मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी का भी बड़ा बयान सामने आया है। मुख्यमंत्री धामी ने कड़े और स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम कानून के दायरे में रहकर बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई करेंगे। देवभूमि उत्तराखंड सभी को गले लगाता है और सभी धर्मों का पूरा सम्मान करता है। हमारा राज्य श्री हेमकुंड साहिब, नानकमत्ता साहिब और रीठा साहिब जैसे परम पवित्र स्थलों का घर है, जो हमारे पूज्य सिख गुरुओं की धरोहर हैं। सभी धर्मों का आदर करना हमारी संस्कृति के मूल में है, लेकिन कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। गौरतलब है कि यह पूरा विवाद 20 जून की शाम से शुरू हुआ, जब सात से आठ निहंग सिखों ने नगरासू गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जा कर लिया। शुरुआत में इन निहंगों ने गुरुद्वारे के दो सेवादारों को बंधक बना लिया था, जिससे पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। हालांकि, प्रशासन के दबाव के बाद 21 जून को दोनों सेवादारों को छोड़ दिया गया, लेकिन निहंग अपने घातक पारंपरिक हथियारों के साथ छत पर ही डटे रहे। सोमवार को स्थिति तब और बिगड़ गई जब ऊपरी मंजिल पर मौजूद निहंगों ने नीचे तैनात स्थानीय पुलिस और आईटीबीपी (ITBP) के जवानों पर कई बार पथराव किया। इस पूरे फसाद की जड़ें 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई एक घटना से जुड़ी हैं। दरअसल, हेमकुंड साहिब के दर्शन कर लौट रहे कुछ निहंग श्रद्धालुओं का स्थानीय व्यापारियों के साथ किसी बात पर विवाद हो गया था। यह विवाद देखते ही देखते खूनी झड़प में बदल गया, जिसमें दो निहंगों ने कथित तौर पर तलवार चला दी, जिससे कई स्थानीय लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तलवार चलाने वाले दो निहंग सिखों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब नगरासू गुरुद्वारे की छत पर कब्जा जमाए बैठे निहंगों की मुख्य मांग है कि जेल में बंद उनके दोनों साथियों को तुरंत रिहा किया जाए और कर्णप्रयाग के स्थानीय व्यापारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए। मामले को शांत कराने के लिए पुलिस की रणनीति रंग ला रही है। 21 जून की शाम पुलिस के समझाने पर एक निहंग ने आत्मसमर्पण कर दिया था, जबकि सोमवार (22 जून) को एक और निहंग को उस समय दबोच लिया गया जब वह चुपके से नीचे खाना लेने आया था। हालांकि, बाकी निहंग अब भी हथियारों के साथ अड़े हुए हैं। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने नगरासू और कर्णप्रयाग के संवेदनशील इलाकों में तुरंत प्रभाव से धारा 163 (निषेधाज्ञा) लागू कर दी है और पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया है।