Mar 22, 2026

शिक्षक संगठनों की मांग पर पुनर्विचार: क्या सरकार पदोन्नति के कोटे में करेगी कोई बड़ी वृद्धि?

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देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी हाईस्कूलों और इंटरमीडिएट कॉलेजों में प्रधानाध्यापक व प्रधानाचार्य के पदों पर भारी कमी बनी हुई है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार, हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक के लगभग 850 और इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के करीब 1210 पद खाली हैं, जो कुल रिक्तियों का 93 प्रतिशत है। इनमें से 50 प्रतिशत पदों को सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद सीमित विभागीय भर्ती से भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार ने पहले इन 50 प्रतिशत पदों पर सीमित विभागीय परीक्षा कराने का निर्णय लिया था और इसके लिए राज्य लोक सेवा आयोग (UKPSC) को प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन राजकीय शिक्षक संघ के विरोध के बाद प्रस्ताव वापस ले लिया गया। शिक्षकों का तर्क था कि प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के सभी खाली पद पदोन्नति के हैं और इन्हें पूरी तरह पदोन्नति से ही भरा जाना चाहिए।

शिक्षा मंत्री डॉ. रावत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के आदेश के बाद प्रस्ताव वापस लिया गया। सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय आने के बाद ही भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। इससे पहले 2025 में प्रधानाचार्य के 692 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया भी सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और टीईटी अनिवार्यता जैसे मुद्दों के कारण निरस्त कर दी गई थी, जिससे विभागीय स्तर पर भर्ती पर असर पड़ा। इस बीच, विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 133 अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में 413 तदर्थ प्रवक्ता और एलटी शिक्षक मौलिक नियुक्ति के लिए अर्ह नहीं हैं। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा अधिनियम 2006 की धारा 40 में तदर्थ सेवाओं के विनियमितीकरण की व्यवस्था है, लेकिन वर्तमान में विनियमितीकरण के लिए 30 जून 2010 की कट-ऑफ तिथि तय है। इन शिक्षकों की नियुक्ति इस तिथि के बाद होने के कारण वे मौलिक नियुक्ति के पात्र नहीं माने जा रहे हैं।शिक्षा विभाग में प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के खाली पदों से स्कूलों का प्रशासनिक ढांचा प्रभावित हो रहा है। कई स्कूलों में प्रभारी प्रधानाध्यापक कार्यरत हैं, जिससे निर्णय लेने और अनुशासन में चुनौतियां आ रही हैं। मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 50 प्रतिशत पदों पर सीमित विभागीय परीक्षा से योग्य शिक्षकों को अवसर मिलेगा, जबकि शेष पद पदोन्नति से भरे जाएंगे। इससे शिक्षकों के बीच असंतोष कम होगा और स्कूलों में नेतृत्व मजबूत होगा। यह मुद्दा उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। शिक्षक संगठन पदोन्नति पर जोर दे रहे हैं, जबकि सरकार संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहती है। अंतिम फैसले के बाद भर्ती प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है, जिससे हजारों छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी।