Apr 06, 2026

शिक्षक सेवा नियमावली में संशोधन की प्रक्रिया तेज, पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना अब अनिवार्य

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देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे करीब 16,000 सहायक अध्यापकों के लिए राहत भरी खबर है। शिक्षा विभाग 'उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक अध्यापक सेवा नियमावली' में बड़े संशोधन की तैयारी कर रहा है। इस संशोधन के लागू होते ही प्रदेश के हजारों शिक्षकों की पदोन्नति की बाधाएं दूर हो जाएंगी। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में शासन को विधिवत प्रस्ताव भेज दिया है।

दरअसल,1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कक्षा 1 से 8वीं तक पढ़ाने वाले सभी सरकारी और अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें 2 साल के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। इस फैसले का असर उत्तराखंड की वर्तमान नियमावली पर पड़ा। राज्य में अब तक प्राथमिक सहायक अध्यापकों की पदोन्नति प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक या जूनियर हाईस्कूल के सहायक अध्यापक के पद पर 'वरिष्ठता' (Seniority) के आधार पर होती थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वरिष्ठता और टीईटी की अनिवार्यता के बीच टकराव पैदा हो गया, जिससे टीईटी पास कर चुके पात्र शिक्षकों की पदोन्नति भी तकनीकी रूप से रुक गई थी। अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान नियमावली में केवल वरिष्ठता का प्रावधान है। अब इसमें संशोधन कर 'वरिष्ठता के साथ टीईटी की अनिवार्यता' को जोड़ा जाएगा। इस बदलाव के बाद टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता तुरंत खुल जाएगा, जबकि बिना टीईटी वाले शिक्षकों को कोर्ट द्वारा निर्धारित समय सीमा में परीक्षा पास करनी होगी। शिक्षा निदेशालय के इस कदम से न केवल प्राथमिक स्तर पर प्रशासनिक ढांचा मजबूत होगा, बल्कि स्कूलों को नए प्रधानाध्यापक भी मिल सकेंगे। शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव पर शासन की मुहर लगते ही पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। शिक्षकों का मानना है कि इस फैसले से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और लंबे समय से लंबित करियर संबंधी लाभ उन्हें मिल सकेंगे।